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ॐ🙏श्री हनुमान चालीसा पाठ हिंदी में | 40 Chopai Hanuman Chalisa Pdf Download Kare

🚩🛕दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको Hanuman Chalisa Hindi Lyrics or hanuman chalisa pdf के बारे में विस्तार से बताने वाले है – हनुमान जी बालाजी आप सभी भक्तो पर कृपा बनाये रखे. आप सभी लोगो को विस्वाश दिलाता हु के यदि आप हनुमान चालीसा मंगलवार और शनिवार को जप करते है तो बालाजी आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे ।

ॐ🙏Hanuman chalisa pdf in Hindi

दोस्तों इस पोस्ट में हम आपको हनुमान चालीसा का संस्कृत अनुवाद के साथ साथ हिंदी में भी अर्थ बताने का प्रयास कर रहे है। हनुमान चालीसा इन हिंदी (Hanuman Chalisa pdf in Hindi) का चमत्कार हर घर तक पहुंचे यही हमारी दिल से इच्छा है। परिवार के सभी सदस्य हर मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करे जिनसे घर में सुख शांति बानी रहे। अपने बच्चू में भी अपनी हिन्दू देवी देवता के संस्कृति से जुड़ाव करने के लिए यहाँ प्रयास करना चाइये।

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

श्री गुरु महाराज के चरण कमलो की धूलि के अपन मन रूपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हु, जो चारों फल धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष को देने वाला है

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार, बल बुधि विद्या देहु मोहि, हरहु कलेश विकार

हे पवन कुमार ! मेँ आपको सुमिरन करता हु। आप जानते ही है के मेरी शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शरीरिक बल , सद्धबुद्धि एवं ज्ञान दीजिये और मेरे दुःख दोषो का नाश कर दीजिये

हनुमान चालीसा पढ़ने के लाभ और उनकी मान्यताये

हिन्दू लोगो के मान्यता के अनुसार हनुमान चालीसा पढ़ने के कुछ निम्न लिखित कारन यहाँ भी है :

ॐ🚩🛕भगवान हनुमान का आशीर्वाद पाने के लिए : हनुमान चालीसा भगवान हनुमान को समर्पित एक भक्ति भजन है, और ऐसा माना जाता है कि इसे विश्वास और भक्ति के साथ पढ़ने से कई आशीर्वाद मिल सकते हैं, जैसे बुराई से सुरक्षा, प्रयासों में सफलता और मन की शांति।

ॐ🚩🛕बाधाओं और चुनौतियों पर काबू पाने के लिए : भगवान हनुमान अपनी ताकत, साहस और दृढ़ संकल्प के लिए जाने जाते हैं। माना जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से लोगों को अपने जीवन में छोटी-बड़ी बाधाओं और चुनौतियों से उबरने में मदद मिलती है।

ॐ🚩🛕उनके आध्यात्मिक कल्याण में सुधार करना : हनुमान चालीसा एक सुंदर और प्रेरणादायक भजन है जो लोगों को उनके आध्यात्मिक पक्ष से जुड़ने में मदद कर सकता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ लोगों को उनकी भक्ति, एकाग्रता और ज्ञान विकसित करने में मदद कर सकता है।

ॐ🚩🛕अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण का अनुभव करने के लिए : ऐसा माना जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से लोगों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इसे तनाव, चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी स्थितियों के लिए फायदेमंद माना जाता है।

Hanuman Chalisa Pdf 🚩🛕🐚🕉️with Hindi Anuvad

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Hanuman Chalisa pdf Lyrics

हनुमान चालीसा हिंदू पौराणिक कथाओं में एक प्रमुख व्यक्ति भगवान हनुमान को समर्पित एक भक्ति भजन है। इसमें अवधी भाषा में 40 छंद शामिल हैं और दुनिया भर में लाखों हिंदुओं द्वारा व्यापक रूप से सम्मानित और पढ़ा जाता है। हनुमान चालीसा के गीत हनुमान की शारीरिक और आध्यात्मिक विशेषताओं, उनके वीर कर्मों और हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन करते हैं।

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥१॥

श्री हनुमान जी ! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर ! आपकी जय हो ! तीनो लोकों , स्वर्गलोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।

राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥२॥

हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नहीं है

महाबीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥३॥

हे महावीर बजरंग बली!आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालों के साथी, सहायक है।

कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुंडल कुँचित केसा॥४॥

आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजे॥५॥

आपके हाथ में बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।

शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जगवंदन॥६॥

शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है।

विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥७॥

आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम के काज करने के लिए आतुर रहते है।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मनबसिया॥८॥

आप श्री राम चरित सुनने में आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय में बसे रहते है।

सूक्ष्म रूप धरि सियहि दिखावा, विकट रूप धरि लंक जरावा॥९॥

आपने अपना बहुत छोटा रूप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके लंका को जलाया।

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भीम रूप धरि असुर सँहारे, रामचंद्र के काज सवाँरे॥१०॥

आपने विकराल रूप धारण करके राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उद्‍देश्यों को सफल कराया।

लाय सजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए॥११॥

आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत-हि सम भाई॥१२॥

श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।

सहस बदन तुम्हरो जस गावै, अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥१३॥

श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा॥१४॥

श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥१५॥

यमराज, कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा॥१६॥

आपने सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना, लंकेश्वर भये सब जग जाना॥१७॥

अर्थ- आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।

जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लिल्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥१८॥

जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है कि उस पर पहुंचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझकर निगल लिया।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माही, जलधि लाँघि गए अचरज नाही॥१९॥

आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुंह में रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नहीं है।

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥२०॥

संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।

राम दुआरे तुम रखवारे, होत ना आज्ञा बिनु पैसारे॥२१॥

श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप रखवाले है, जिसमें आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नहीं मिलता अर्थात् आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।

सब सुख लहैं तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहु को डरना॥२२॥

जो भी आपकी शरण में आते है, उस सभी को आनन्द प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक है, तो फिर किसी का डर नहीं रहता।

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक तै कापै॥२३॥

आपके सिवाय आपके वेग को कोई नहीं रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक कांप जाते है।

भूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥२४॥

जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते।

नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥२५॥

वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।

संकट तै हनुमान छुडावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥२६॥

हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥२७॥

तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।

और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥२८॥

जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करें तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन में कोई सीमा नहीं होती।

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥२९॥

चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग में आपका यश फैला हुआ है, जगत में आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।

साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥३०॥

हे श्री राम के दुलारे! आप सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥

आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।

राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥३२॥

आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण में रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।

तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥३३॥

आपका भजन करने से श्री राम जी प्राप्त होते है और जन्म जन्मांतर के दुख दूर होते है।

अंतकाल रघुवरपुर जाई, जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥३४॥

अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलाएंगे।

और देवता चित्त ना धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥३५॥

हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नहीं रहती।

संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।

जै जै जै हनुमान गुसाईँ, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥३७॥

हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझ पर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।

जो सत बार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई॥३८॥

जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बंधनों से छूट जाएगा और उसे परमानन्द मिलेगा।

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्ध साखी गौरीसा॥३९॥

भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है, कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।

तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥४०॥

हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है। इसलिए आप उसके हृदय में निवास कीजिए।

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दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

सीरवी समाज का इतिहास (HISTORY OF SIRVI SAMAJ ) सीरवी समाज का इतिहास (HISTORY OF SIRVI SAMAJ ) और आई माताजी की फोटो डाउनलोड (AAI MATA PHOTO DOWNLOAD) करने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करे।