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आईमाता जी की जीवनी

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आईमाता जी की जीवनी, विशेष

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आई माता जी Aai Mata Images की फोटो के साथ अपने दिन के सुरुवात करने के लिए इस वेबसाइट (seervisamaj.in) से आई माताजी के इमेजे फोटो डाउनलोड करके अपने सोशल मीडिया चैनल और व्हाट्सप्प पे शेयर कर सकते है। सीरवी समाज का इतिहास (HISTORY OF SIRVI SAMAJ ) के साथ आई माता जी का नाम इस तरह से जुड़ा है जैसे दिया और बाती। अपने परिवार और मित्रो के साथ भी इस वेबसाइट को शेयर करे श्री आई माताजी आप सभी का भला करे । यदि कोई गंभीरता से आपके जीवन का हिस्सा बनना चाहता है तो वो न कोई बहाना ढूंढेगा और न कोई कारण। सुप्रभात..!! seervi-samajDownload Image of Aai Mata - Suprabhat बड़ा बनो पर उनके सामने नहीं जिसने तुम्हे बड़ा किया हो। सुप्रभात..!! Aai Mata Ji Bilara - Suprabhat shri_aaimataji_hd_photoDownload मंजिल तो मिलेगी भटक कर ही सही गुमराह तो वो लोग है जो घर से निकले ही नहीं। स...
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आईमाता जी की जीवनी, विशेष

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Aai Mata Photo Download kare हमारा देश भारत धर्म के नाम पर सबसे ऊंचा है | यहां पर विभिन्न धर्म और पंथ को मानने वाले लोग रहते हैं | भारत की पावन भूमि पर अनेकों साधु-सतों ने अवतार लिया और धर्म और पंथ के माध्यम से लोगों को जीवन जीने का तरीका सिखाया | इसी धर्म की राह पर 500 बरस पहले आई पंथ भी वजूद में आया जिनकी स्थापना आई माताजी ने की थी | वैसे तो इस धर्म को मानने वाले भारत के हर कोने में लोग मिल जाएंगे पर खासकर राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में इस पंथ को मानने वाले लोग ज्यादा रहते हैं | सीरवी समाज के लोग आई पंथ को मानने के साथ-साथ आई माताजी को अपनी कुलदेवी मानते हैं | आई पंथ को मानने वाले अपने जीमने हाथ में 11 गांठ का डोरा बंदथे है जिसको बेल कहते हैं | आई माताजी ने बैल बांधने के साथ-साथ आई पंथ मानने वाले लोगों और सीरवी समाज के लोगो को जीवन जीने के लिए 11 नियम भी बताएं जि...
जीवण (जाणोजी राठौड़) सीरवी के घर आगमन
आईमाता जी की जीवनी

जीवण (जाणोजी राठौड़) सीरवी के घर आगमन

श्री आईजी बिलाड़ा में ऐसे व्यक्ति के घर पधारीं जिसके भौतिक संसार में भयंकर तूफान मचा हुआ था । केवल ईश्वर भजन उस व्यक्ति को व उसकी धर्मपत्नी को जिन्दा रखे हुए था। उस व्यक्ति का नाम था जीवण (जाणोजी राठौड़) सीरवी। जीवन सीरवी बहुत दरिद्र और दुखी थे। उनके दुख की पराकाष्ठा तब पार कर गई जब उनके बुढ़ापे का एक मात्र सहारा इकलौता पुत्र बचपन में ही खो गया था। वे उसको खोजते – खोजते बूढ़े व निराश हो गए थे। ऐसे दुखियारे के घर के भाग्य द्दार उस समय खुले जब श्री आईजी उनके घर के दरवाजे के सामने जाकर ‘माधो की मां बाहर आ’ ऐसी आवाज दी। माधो जीवन राठौड़ का खोया पुत्र था। इस संसार में मां की ममता का वर्णन करना कठिन है परन्तु ऐसी मां की ममता का वर्णन करना लगभग असंभव है । जिसका पुत्र वर्षों पूर्व खो गया हो तथा वह उसे पाने के लिए पागल हो। श्री आईजी के दर्शन पाकर जीवण तथा उनका पत्नी ने आदर के साथ उसको घर ले गए। संतो व स...
बिलाड़ा धाम मैं आगमन
आईमाता जी की जीवनी

बिलाड़ा धाम मैं आगमन

श्री आईजी बीला हाम्बड़ के घमण्ड को चूर कर बिलाड़ा पधारी। बिठुडा पीरान के वर्तमान पीरोंसा के पास उपलब्ध एक प्राचीन बही के अनुसार बिलाड़ा के पास बिलपुर नामक स्थान था । कालान्तर में बिलपुर तथा बिलाड़ा एक हो गए परन्तु बिलाड़ा नाम ही प्रचलन में रहा । राम द्दारा जिस द्रमकुल्य सागर को बाण (आग्नेयास्त्र) द्दारा सूखाकर मरुभूमि बनाने का वर्णन रामायण में है , वह स्थान जोधपुर के निकट बिलाड़ा धाम है तथा भगवान राम का बाणगंगा के कुण्ड में गिरा था। आई माताजी के बारे में और पढ़ें - click here ...
बीला हाम्बड़ के घमण्ड को चूर किया
आईमाता जी की जीवनी

बीला हाम्बड़ के घमण्ड को चूर किया

जीजी पाल से जीजी नगाजी हांबड़ की ढ़ाणी पधारी । नगाजी हांबड़ का ज्येष्ठ पुत्र बिला बहुत अत्याचारी सूदखोर , क्रुर तथा नास्तिक था। ढ़ाणी के निवासी उससे बहुत परेशान थे । वे बीला को ईश्वर से सजा मिले ऐसा सोचा  करते थे क्योकिं जो व्यक्ति अत्याचार सहता है परन्तु न्याय नहीं पा सकता ,वह न्याय की गुहार के लिए ईश्वर के विधान में ही विश्वास करता है। बीला हांबड़ के पापों व अत्याचारों का घड़ा भर चुका था अत: श्री आईजी उसके घर गए व रात्रि विश्राम हेतु स्वीकृति मांगने लगे। धन तथा बड़पप्न में अन्धे बीला हांबड़ ने श्री आईजी का घोर अपमान किया। बीला हांबड़ द्दारा किए गए अनुचित अपमान को सहते हुए श्री आईजी ने उसके कर्मों का फल भुगतने का अभिशाप दिया। श्री आईजी के शाप के फलस्वतुप बीला हांबड़ के धन – दौलत, पुत्र, बहुएं, गायै, वैभव तथा फला – फूला ताश के पतों की तरह बिखर गया। संतों व साध्वियों के अपमान का फल अत्यन्त कष्टकारी ह...
जीजी पाल कि स्थापना
आईमाता जी की जीवनी

जीजी पाल कि स्थापना

जीजी के रज कणो से बना टीला बाद में जीजी पाल के नाम से प्रसिद्द हुआ। जीजी बिलावास से गांव खारिया नींव होते हुए बिलाड़ा (बिलपुर) की दक्षिण की ओर आठ किलोमीटर दूर एक स्थान पर उनके बैल को भादवे महिने की ताजी घास में स्वेच्छा से चरता देखकर आराम करनें लगीं । उस स्थान पर पहले से ही सीरवीयों के कुछ लड़के पश नजदीक खींच लिया। लड़के जीजी के चारो ओर बैठकर जीजी की बातें सुनने एवं दर्शन का आन्नद उठाने लगे। अचानक उतर दिशा से काले कजरारे बादल आए और तीव्र गर्जना के साथ मूसलाधार बरसने  लगे । कुछ ही समय में वहां पानी हो गया । जीजी, लड़के और पशु वहां खड़े एक खेजड़ी के वृक्ष के निचे आ गए। चारों तरफ बाढ़ जैसी स्थिती होने के कारण खेजड़ी के नीचे भी पानी आने लगा। लड़के तथा घबराने लगे। जीजी ने उसके पांवो में पहनी मोजड़ियां उतारी और उनमे आए रज  कणो को उस स्थान पर डालते ही एक बड़ा टीला बन गया। लड़के व पशु वर्षा के जल मे...
बिलावास मैं आगमन
आईमाता जी की जीवनी

बिलावास मैं आगमन

बिला जीजी  की ऐसी सेवा करने लगा मानो उसे उसकी वर्षो की तपस्या का फल मिल गया हो। जीजी सोजत से आगे सूकड़ी नदी के किनारे बिलावास पधारीं जहां बिला नामक एक ईश्वर भक्त सीरवी परिवारों के साथ ढ़ाणी बसाकर रह रहा था। जीजी को दिव्य रुप में देखकर बिला का उत्साही मन भाव विह्रल हो गया। उसने जीजी को दण्डवत्‌ प्रणाम कर उसकी ढ़ाणी को पवित्र करने का निवेन किया। बिला उसकी ईश्वर भक्त पत्नी तथा अन्य लोगो ने गद्‌गद हो जीजी की सेवा साधना की ।जीजी बिला और अन्य व्यक्तियो के भावो और उत्सुकता युक्त सेवा से अत्यधिक प्रसन्न हुए। जीजी ने बिला तथा अन्य लोगो के सुखमय जीवन जीने की कामना की और बिला की ढ़ाणी के फलने – फुलने का आर्शिवाद भी दिया। जीजी की मेहरबानी और दया से बिला की ढ़ाणी बिलावास बन गया। इस गांव के लगभग सभी लोग जीजी के अनुयायी बन गए। आई माताजी के बारे में और पढ़ें - click here ...
मालिन को ज्ञान
आईमाता जी की जीवनी

मालिन को ज्ञान

जीजी आगे बढ़ी । सेहवाज एवं बगड़ी नगर के बीच श्री आईजी को एक मालिन सब्जी का ओड़ा (बड़ी छाबड़ी) लेकर मिली जिसमे बथुआ, पालक, चन्द्रलोई आदि था। जीजी ने सारी सब्जी को एक सोने के टके में खरीदकर उनके नंदिये को खिला दिया । जीजी ने उस मालिन को सलाह भी दी कि तुम्हारी आज की मजदूरी हो गई है अत: घर जाकर ईश्वर ध्यान करना। लालची मालिन जीजी की सलाह को नहीं मानते हुए पुन: सब्जी का ओड़ा भरकर बेचती हुई संयोग से जीजी को पुन: रास्ते में मिल गई । जीजी ने उसे सवेरे वाली सलाह याद दिलाई और कहा कि जो मनुष्य भगवान लोभ को छोड़कर धन लोभ में लगा रहता है वह न तो माया प्राप्त कर सकता है और न ही राम । इसलिए कहा ‘ दुविधा में दोनो गये , गाय मिली न राम । ’ इस प्रकार जीजी का सन्देश वेदों, पुराणो, संत वाणियो, उपनिषदों आदि के गुढ़ार्थ के सरलीकृत रुप में निहित हैं । इस प्रकार तत्व चिन्तन कभी प्राचीन एवं समय से परे नहीं हो सकता । आई मा...
भैसाणा गांव मैं आगमन
आईमाता जी की जीवनी

भैसाणा गांव मैं आगमन

अलौकिक जीजी डायलाणा से दूसरे दिन भैसाणा नामक गांव पहुंची । गांव के बाहर एक तालाब के किनारे एक ग्वाले ने जब इस साध्वी  महिला को भगवा पोशाक तथा बैल के साथ देखा तो कोई तांत्रिक जानकर जीजी को भला – बुरा कहने लगा अन्धविश्वासों के कारण गांवो में दुधारु पशुओं  को तथाकथित तांत्रिकों , जादूगरों तथा कर्मकाण्डयो से दूर रखने की कोशिश की जाती थी ताकि पशु बीमार नहीं पड़े व दूध निकालवाने में आनाकारी नहीं करें । जीजी ने ग्वाले के अपशब्दों तथा क्रोध पर कोई ध्यान नहीं दिया एवं मूर्ख तथा अज्ञानी मानकर आगे बढ़ने लगीं परन्तु क्रोधी ग्वालें के बेकाबूपन ने जीजी के बैल को पीटने की हिमाकत कर डाली और जीजी की ओर भी फेंकने के लिए इधर – उधर पत्थर ढ़ूंढ़ने लगा । उधर जीजी के शाप से भैंसें पत्थर बन चुकी थी । ग्वाले की नजर जब उसकी गासो – भैसो की तरफ गई तब उसके हाथ में उठाया हुआ पत्थर उसके हाथ से उसके पास ही गिर गया ...
जीजी बड़ नामकरण
आईमाता जी की जीवनी

जीजी बड़ नामकरण

थके- हारे किसानों की आंख लगने के पश्चात्‌ ह्ल की हाल का विशालकाय वट वृक्ष तथा जुए की सिवल का रोईण का वृक्ष बन गए । जब किसान नींद से जगे तो जीजी वहां नहीं थी । वट वृक्ष तथा रोईण के विशाल वृक्ष जीजी के उपकारों का संदेश दे रहे थे । किसानो ने उस वृक्ष को जीजी बड़ कहना शुरु कर जीजी के उपकारो को स्मरण करने लगे । चीन के दर्शन के अनुसार एक वृक्ष की महता सौ पुत्रो को जन्म देने तथा उन्हे बड़ा करने के समान मानी जाती है । इस प्रकार संत अथवा महान्‌ व्यक्ति जग कल्याण के लिए प्रकृति का रुप बदल सकते हैं परन्तु उनका रुप बदलना प्रकृति की व्यवस्था को और उन्नत तथा विकसित करना होता है । तुलसीदास को श्री राम का दर्शन आक को नियमित करना होता है । तुलसीदास को श्री राम का दर्शन आक को नियमित पानी पिलाने के फलस्वरुप ही हुआ था । जीजी के महात्म्य को बढ़ाने तथा आत्मिक शांति एवं संतोष प्राप्त करने के लिए उन सीरवी किसान भाईय...