जय आई श्री अंबे माई आरती का सीरवी समाज की संस्कृति और भक्ति संगीत में विशेष स्थान है, और आरती गाने से मन को असीम शांति व ऊर्जा प्राप्त होती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए, हमने “जय आई श्री अंबे माई, जय आई श्री दुर्गे माई” आरती को AI-generated voice के माध्यम से प्रस्तुत किया है। यह टेक्नोलॉजी और श्रद्धा का एक अनोखा संगम है, जहां डिजिटल युग में भक्ति संगीत को एक नया रूप दिया गया है।
इस आरती में माँ अंबे और माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान किया गया है। भक्तों को आरती गाते समय जो दिव्य अनुभूति होती है, उसे हमने टेक्स्ट-टू-वॉयस तकनीक से संजोने का प्रयास किया है। AI Suno की मदद से बनाई गई यह आरती, पारंपरिक भक्ति संगीत की आत्मा को बरकरार रखते हुए, एक अनूठा डिजिटल अनुभव प्रदान करती है।
अगर आप आध्यात्मिकता और टेक्नोलॉजी के इस नए मेल को अनुभव करना चाहते हैं, तो इस आरती को अवश्य सुनें। इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ साझा करें और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करें। यह एक छोटा-सा प्रयास है भक्ति संगीत को न केवल संजोने बल्कि इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने का।
आपकी आस्था और प्रेम ही इस प्रयास की सच्ची प्रेरणा हैं। आरती को सुनें, गाएं और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करें!

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जय आई श्री अंबे माई आरती- Jai Aai Shree Ambe Mai | LYRICAL VIDEO | सुने और शेयर करे
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श्री आईजी सर्वभूतेषु,
ज्योति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै,
नमस्तस्यै नमो नमः।
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई,
आरती बोलो सब मिल भाई,
आरती गावो सब मिल भाई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
राव भीका घर अम्बापुर में,
अवतार लियो जगदम्बे माई,
ब्याव करन खिलजी जद आयो,
तौबा कर कर जान बचाई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
नारलाई में दियो परचो भारी,
पत्थर शिला माँ अधर धराई,
डायलाणा मे बडलो तो हडालो,
छाया करी जगदम्बे माई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
भेसाणा मे भैसा ए भाटा री,
बिलाड़ा मे माँ ज्योति समाई,
मेवाड़ धरा रायमलजी पाई,
हिन्दूवा सूरज लाज बचाई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
जानोजी रो पूरीयो मनोरथ,
माधवजी सु मेल कराई,
माही बीज दिवान पद राजे,
भादवी बीज ने ज्योति जलाई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
मंदिर बिलाडा मे परचो भारी,
अखण्ड ज्योत सु केसर पाई,
मालवा मेवाड़ गुजरात देशरा,
घर घर में तेरी रहा यश गाई,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
जो कोई आईजी री आरती गावे,
मन वांछित फल पल में पावे,
सीरवी समाज माँ थारा गुण गावे,
आईजी री आरती सुनावे,
जय आई श्री अंम्बे माई,
जय आई श्री दुर्गे माई।।
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